बनाने के लिए सहायता माँगी जाए, जहाँ हमारी अनाथ आश्रयहीन बहनें अपनी मान-मर्यादा की रक्षा करते हुए शांति से रह सकें। कौन ऐसा मुहल्ला है, जहाँ ऐसी दस-पाँच बहनें नहीं हैं। उनके ऊपर जो बीतती है वह क्या आप अपनी आँखों से नहीं देखते? कम-से-कम अनुमान तो कर ही सकते हैं। वे जिधर आँखें उठाती हैं, उधर ही उन्हें पिशाच खड़े दिखाई देते हैं, जो उनकी दीनावस्था को अपनी कुवासनाओं के पूरा करने का साधन बना लेते हैं। हमारी लाखों बहनें इस भाँति केवल जीवन-निर्वाह के लिए पतित हो जाती हैं। क्या आपको उन पर दया नहीं आती? मैं विश्वास से कह सकती हूँ कि अगर उन बहनों को रूखी रोटियों और मोटे कपड़ों का भी सहारा हो, तो वे अंत समय तक अपने सतीत्व की रक्षा करती रहें। स्त्री हारे दर्जे की दुराचरिणी होती है। अपने सतीत्व से अधिक उसे संसार की और किसी वस्तु पर गर्व नहीं होता, न


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या न रोई हो; पर पूर्णा अपने दुर्भाग्य पर घंटों रोती रही। अभी तक सुमित्रा को प्रसन्न करने की चेष्टा में वह इस दुर्घटना की कुछ विवेचना कर न सकी थी। अब आँखों में आँसुओं की बड़ी-बड़ी बूँदें गिराती हुई वह इन सारी बातों की मन-ही-मन आलोचना करने लगी। कमलाप्रसाद क्या वास्तव में एक साड़ी उसके लिए लाए थे? क्यों लाए थे? एक दिन को छोड़ कर तो वह फिर कभी कमलाप्रसाद से बोली तक नहीं थी। उस दिन भी वह स्वयं कुछ न बोली थी। कमलाप्रसाद की ही बातें सुन रही थी। हाँ,


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