उनका भोगालय होगा, इसीलिए हम उनका विरोध कर रहे हैं। यदि वह विधवा से विवाह करना चाहते हैं, तो देश में विधवाओं की कमी है? पर वह विवाह न करेंगे। बाजे आदमियों को टट्टी की आड़ से शिकार खेलने में ही मजा आता है, मगर ईश्वर ने चाहा तो उनका आश्रम बन कर तैयार न हो सकेगा। सारे शहर में उन्हें कौड़ी भर की मदद न मिलेगी। (घड़ी की ओर देख कर) अरे! दो बज रहे हैं अब विलंब नहीं करना चाहिए। आओ, उस दीपक के सामने ईश्वर को साक्षी करके हम शपथ खाएँ कि जीवन-पर्यंत हम पति-पत्नी व्रत का पालन करेंगे।'

यह कहती हुई वह किवाड़ खोल कर तेजी से बाहर निकल गई और कमलाप्रसाद खड़े ताकते रह गए। चिड़िया दाना चुगते-चुगते समीप आ गई थी; पर ज्यों ही शिकारी ने हाथ चलाया, वह फुर से उड़ गई; मगर क्या वह सदैव शिकारी के प्रलोभनों से बचती रहेगी?


136 of 180



कमलाप्रसाद ने जोर दे कर कहा - 'यह कभी नहीं हो सकता पूर्णा, जरूरत पड़े तो तुम्हारे लिए प्राण तक दे दूँ। जब चाहे परीक्षा ले कर देखो।'

कमलाप्रसाद ने मुँह लटका कर कहा - 'पूर्णा, मैं तो मर जाऊँगा। सच कहता हूँ, मैं जहर खा कर सो रहूँगा, और हत्या तुम्हारे सिर जाएगी।'

यह अंतिम वाक्य पूर्णा ने सुना था या नहीं, हम नहीं कह सकते। उसने द्वार खोला और आँगन की ओर चली। कमलाप्रसाद द्वार पर खड़ा ताकता रहा। पूर्णा को रोकने का उसे साहस न हुआ। चिड़िया


136 of 297