कि उसे तुमसे सच्चा प्रेम है। नहीं तो समझ लेना उसने कामवासना की धुन में तुम्हारी आबरू बिगाड़ने का निश्चय किया है। अगर वह इनकार करे, तो उससे फिर न बोलना न उसकी सूरत देखना। मैं कहो लिख दूँ कि वह विवाह करने पर कभी राजी न होगा। वह तुम्हें खूब सब्ज-बाग दिखाएगा, तरह-तरह के बहाने करेगा, मगर खबरदार उसकी बातों में न आना! पक्का जालिया है! रही मैं! मैंने तो मन में ठान लिया है कि लाला के मुख में कालिख पोत दूँगी। बला से मेरी आबरू जाए, बला से सर्वनाश हो जाए, मगर इन्हें कहीं मुँह दिखाने लायक न रखूँगी।'

सुमित्रा - 'तुम्हारे डूब मरने से मेरा क्या उपकार होगा? न वह अपना स्वभाव छोड़ सकते हैं, न मैं अपना स्वभाव छोड़ सकती हूँ। न वह पैसों को दाँत से पकड़ना छोडेंगे और न मैं पैसों को तुच्छ समझना छोड़ूँगी। उन्हें छिछोरेपन से प्रेम है, अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनने


141 of 180

आनंदप्रद समय होता था जब दाननाथ के सामने थाल रख कर वह खिलाने बैठती थी। किसी महाराज या रसोइए, कहार या महरी को वह इस आनंद में बाधा न डालने देना चाहती थीं, फिर वह जिएँगी कैसे? जब तक दाननाथ को अपने सामने बैठ कर खिला न लें, उन्हें संतोष न होता था। दाननाथ भी माता पर जान देते थे, चाहते थे कि यह अच्छे से अच्छा खाएँ, पहनें और आराम से रहें मगर उनके पास बैठ कर बालकों की तोतली भाषा से बातें करने का उन्हें न अवकाश था न रूचि। दोस्तों के


141 of 297