का खब्त। मुझे इन बातों से घृणा है। अब तक मैंने उन्हें इतना छिछोरा न समझा था। समझती थी, वह प्रेम कर सकते हैं। स्वयं उनसे प्रेम करने की चेष्टा करती थी, पर रात जो कुछ देखा, उसने उनकी रही-सही बात भी मिटा दी और सारी बुराइयाँ सह सकती हूँ, किंतु लंपटता का सहन करना मेरी शक्ति के बाहर है। मैं ईश्वर को साक्षी दे कर कहती हूँ पूर्णा, तुम्हारी ओर से कोई शिकायत नहीं। तुम्हारी तरफ से मेरा दिल बिल्कुल साफ है। बल्कि मुझे तुम्हारे ऊपर दया आती है। मैंने यदि क्रोध में कोई कठोर बात कह दी हो, तो क्षमा करना। जलते हुए हृदय से धुएँ के सिवा और क्या निकल सकता है?'

सुमित्रा ने उसे उठा कर छाती से लगाते हुए कहा - 'मैंने तो कह दिया बहन, कि मेरा दिल तुम्हारी ओर से साफ है। बस, अब तो ऐसी युक्ति निकालनी चाहिए कि इस धूर्त से पीछा छूटे। उसे तुम्हारी ओर ताकने का भी साहस न हो। उसे तुम अबकी कुत्ते की भाँति दुत्कार दो।'


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साथ गप-शप करने में उन्हें अधिक आनंद मिलता था। वृद्धा ने कभी मन की बात कही नहीं, पर उसकी हार्दिक इच्छा थी कि दाननाथ अपना पूरा वेतन लाकर उसके हाथ में रख दें, फिर वह अपने ढंग पर खर्च करती। तीन सौ रुपए थोड़े नहीं होते, न जाने कैसे खर्च कर डालता है। इतने रूपयों की गड्डी को हाथों से स्पर्श करने का आनंद उसे कभी न मिला था। दाननाथ में या तो इतनी सूझ नहीं थी, या तो लापरवाह थे। प्रेमा ने दो ही चार महीने में घर को सुव्यवस्थित कर दिया। अब हरेक


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