ठिकाना नहीं। भिक्षा माँग कर लोग कन्या का विवाह करते हैं। मोहल्ले में कोई लड़की अनाथ हो जाती है, तो चंदा माँग कर उसका विवाह कर दिया जाता है। मेरे यहाँ किस बात की कमी है। मैं तुम्हारे लिए कोई और वर तलाश करूँगी। यह जाने-सुने आदमी थे, इतना ही था, नहीं तो बिरादरी में एक से एक पड़े हुए हैं। मैं कल ही तुम्हारे बाबूजी को भेजती हूँ।'

प्रेमा ने जमीन की तरफ देखते हुए कहा - 'नहीं अम्माँ जी, मेरे लिए आप कोई फिक्र न करें। मैंने क्वाँरी रहने का निश्चय कर लिया है।'

कमलाप्रसाद ने आते-ही-आते कहार से पूछा - 'बरफ लाए?'

कमलाप्रसाद ने गरज कर कहा - 'जोर से बोलो, बरफ लाए कि नहीं? मुँह में आवाज नहीं है?'

कहार ने देखा कि अब बिना मुँह खोले कानों के उखड़ जाने का भय है, तो धीरे से बोला - 'नहीं, सरकार।'

कहार - 'पैसे न थे।'

कहार - 'हाँ हुजूर, किसी ने सुना नहीं।'


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बड़े असमंजस में पड़ गई। पति के स्वभाव से वह परिचित थी, लेकिन उन्हें इतना विचार-शून्य न समझती थी। उसे आशा थी कि अमृतराय समझाने से मान जाएँगे, लेकिन उनके पास जाए कैसे। पति से रार कैसे मोल ले।

देवकी ने कहा- 'रोओ मत बेटी, मैं कल उन्हें बुलाऊँगी। मेरी बात वह कभी न टालेंगे।'

देवकी ने विस्मय से प्रेमा की ओर देखा, लड़की यह क्या कह रही है, यह उसकी समझ में न आया।

देवकी ने कहा - 'और तेरा क्या हाल होगा, बेटी?'

देवकी ने आँसू भरी


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