और जब तक दोनों की उन्नति न होगी, जीवन सुखी न होगा। पुरुष के विद्वान होने से क्या स्त्री विदुषी हो जाएगी? पुरुष तो आखिरकार सादे ही कपड़े पहनते हैं, फिर स्त्रियाँ क्यों गहनों पर जान देती हैं? पुरूषों में तो कितने ही क्वाँरे रह जाते हैं, स्त्रियों को क्यों बिना विवाह किए जीवन व्यर्थ जान पड़ता ? बताओ? मैं तो सोचती हूँ, क्वाँरी रहने में जो सुख है, वह विवाह करने में नहीं है।'

प्रेमा ने अमृतराय की प्रतिज्ञा का हाल न कहा। वह जानती थी कि इससे पूर्णा की निगाह में उनका आदर बहुत कम जो जाएगा। बोली - 'वह स्वयं विवाह न करेंगे।'

प्रेमा - 'नहीं बहन, झूठ नहीं है। विवाह करने की इच्छा नहीं है। शायद कभी नहीं थी। दीदी के मर जाने के बाद, वह कुछ विरक्त-से हो गए थे। बाबूजी के बहुत घेरने पर और मुझ पर दया करके वह विवाह करने पर तैयार हुए थे, पर अब उनका विचार बदल


8 of 180

इन लोगों के किए और क्या होगा। सब-के-सब मूर्ख हैं, अक्ल किसी को छू नहीं गई।'

कमलाप्रसाद- 'इस वक्त तो बादशाह भी बुलाए तो न जाऊँ। हाँ, किसी दिन जा कर जरा कुशल-क्षेम पूछ आऊँगा। मगर है बिल्कुल सनकी। मैं तो समझता था, इसमें कुछ समझ होगी। मगर निरा पोंगा निकला। अब बताओ, बहुत पढ़ने से क्या फायदा हुआ? बहुत अच्छा हुआ कि मैंने पढ़ना छोड़-छाड़ दिया। बहुत पढ़ने से बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है। जब आँखें कमजोर हो जाती हैं, तो बुद्धि कैसे बची रह सकती है?


8 of 297